नईदिल्ली[संजीवकुमारमिश्र]।किसीबच्चेकेलिए,माता-पिताउनकेपहलेशिक्षकहोतेहैं,लेकिनजैसेहीबच्चाबढ़ताहै,वहसमयउसकीसीमाओंकोविविधबनानेऔरउसेस्वतंत्र,शानदार,औरएकभरोसेमंदव्यक्तित्वमेंविकसितकरनेकाहोताहै।उक्तबातेंशिक्षाविदराजेशकुमारसिंहनेकहीं।उन्होनेकहाकिआजकेजमानेमें,शिक्षककीभूमिकासिर्फशिक्षामुहैयाकरानेतकसीमितनहींहैबल्किअपनेविद्यार्थियोंकेसमग्रविकासमेंभीमददगारहै।स्कूलआपकेबच्चेकोनसिर्फशैक्षिकसमझप्रदानकरतेहैंबल्किस्पोट्र्सयामनोरंजनगतिविधियोंमेंभीउन्हेंसक्षमबनातेहैं।

शिक्षकऔरस्कूलस्टाफछात्रोंपरसकारात्मकअसरडालतेहैंऔरउन्हेंऐसेकौशलविकासकेलिएप्रोत्साहितकरतेहैंजिससेउन्हेंअपनीजिंदगीकेसफरमेंमददमिलेगी।स्कूलपरोक्षयाअपरोक्षतौरपरछात्रोंपरसकारात्मकअसरडालतेहैं।

शैक्षणिकक्षमता

प्रत्येकस्कूलछात्रजिंदगीपरअसरडालनेमेंमहत्वपूर्णयोगदानदेताहै,क्योंकिइससेउन्हेंअपनीअधिकतमशैक्षिकक्षमताकोसामनेलानेमेंमददमिलतीहै।एकप्रभावाालीऔरसक्षमस्कूलनसिर्फएबीसीऔर123सिखानेतकसीमितहोताहैबल्किशिक्षकछात्रोंकोनईचीजेंसिखानेकेप्रभावीतरीकोंपरलगातारकामकरतेहैं।इसतरहसेछात्रसमस्याएंसुलझानेकेकौशलसीखतेहैं।येएक्स्ट्राको-करीकुलरएक्टीविटीजऐसीमानसिकताकतऔरस्थायित्वकेनिर्माणमेंमददगारहोतीहैंजिनसेछात्रोंकोज्यादास्वतंत्रऔरपेशेवरबनानेकाअवसरमिलताहै।समस्यासमाधानयासमाधानतलाानेसेछात्रोंकोसफलहोनेतकप्रयासकरतेरहनेकीप्रेरणामिलतीहै।

मुख्यफोकसशिक्षापरहोनेकेसाथस्कूलोंकादूसराकार्यभीहैऔरवहहैबच्चेकेअंदरज्ञानवर्द्धककौशलकानिर्माणकरना।एकछात्रशैक्षिकतौरपरश्रेठप्रर्दाननहींकरसकताहै,लेकिनदोस्तोंऔरसहपाठियोंकेसमर्थनसे,छात्रअपनीक्षमताबढ़ातेहैंऔरदूसरेछात्रोंकेसाथआकर्षकसंवादकेबारेमेंसीखतेहैं,औरइसेमजबूतसंबंधोंकेतौरपरप्रदर्शितकरतेहैं।किसीबच्चेकीभावनात्मकऔरसांस्कृतिकपरिपक्वताअन्यसभीक्षेत्रोंमेंबालविकासकेलिएजरूरीआधारोंकाप्रतिपादनकरतीहै।छात्रअपनाज्यादातरसमयस्कूलमेंबितातेहैंऔरएकमजबूतसामाजिकसंबंधकेनिर्माणऔरसहानुभूतिपूर्णतरीकेसेछात्रोंकेविकासकेलिएअच्छेपाठ्यक्रममहत्वपूर्णहोतेहैं

चरित्रनिर्माणएवंआत्म-अवधारणा

चरित्रऔरमूल्योंपरध्यानदेनाहमेशाअच्छीशुरुआतहोतीहै,जिससेकिऐसेसमयपरआधारमजबूतबनेजबउसकीवाकईजरूरतहो।चरित्रनिर्माणशैक्षिकउपलब्धियोंकेसंदर्भमेंविकल्पनहींहै,लेकिनइसकेलिएसहायकहै।चूंकिस्कूलमेंपढ़ने,लिखनेऔरअंकगणितपरपाठमेंजल्दीदिलचस्पीदिखतीहै,लेकिनसाथहीयहबच्चोंकोसहानुभूति,सम्मानऔरईमानदारीकेबारेमेंसीखनेमेंभीमददकरताहै।शुरूमें,यहांबोलनेसेपहलेअपनेहाथउठाएंऔरअपनेहाथसीखेरखकरबैठेंजैसेशिष्टाचारकेबारेमेंसिखायाजाताहै।बादमें,स्कूलीशिक्षामेंधार्मिकऔरसामाजिकमुद्दोंकेबारेमेंचर्चाओंकेबारेमेसमझप्रदानकीजातीहै।तबतकबच्चेपूरीतरहपरिपक्वहोजातेहैंऔरबाहरीदुनियामेंकदमरखनेकेलिएतैयारहोतेहैं,उन्हेंअपनेस्वयंकेविचारोंपरमूल्योंपरमजबूतपकड़होनीचाहिए।

स्कूलबच्चेकोउनकीउम्रकेआधारपरसंभावनाओंसेअवगतकराएगा।बच्चेशुरूसेहीछात्रोंयाविभिन्नराट्रीयताओं,संस्कृतियोंऔरपरंपराओंकेशिक्षकोंकेसंपर्कमेंआतेहैं।इससेउनमेंविविधताकेबारेमेंसमझविकसितहोतीहै।इसकेअलावा,व्यापकसीमाओंकेनजरियेसेअवगतहोनेमेंभीमददमिलतीहै।एक्सकर्सन,फील्डट्रिप्सऔरइंटरेक्टिवकेसस्टडीजसेआपकेबच्चेकोनईचीजोंकोसीखनेकामौकामिलेगा,जबकिस्कूलमेंप्रत्येकविविधविषयउनकेभविष्यकासंकेतदेगा।जैसेहीबच्चेपरिपक्वहोतेहैं,कईस्कूलव्यक्तिकेदायरेकोआगेबढ़ानेकेलिएविभिन्नतरहकेअतिरिक्तअवसरभीप्रदानकरातेहैं।

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