संजयश्रीवास्तव। NationalScienceDay2020 महिलाविज्ञानस्नातकोंकेमामलेमेंअव्वलअपनादेशमहिलाओंकोवैज्ञानिकसंस्थानोंमेंकामदेनेमेंसूचीमेंनिचलेपायदानपरहैऔरविज्ञानीमहिलाकार्यबलकेमामलेमें19वेंनंबरपरहै।विज्ञानतकनीककेगहनशोधविकासमेंदेशकीमहिलाओंक्यागतहैइसकेलिएअलगशोधकरनापड़ेगा।देशमेंविज्ञानकेप्रचारप्रसारकेलिएहरसालअलग-अलगथीमकेसाथराष्ट्रीयविज्ञानदिवसमनायाजाताहै,इसबारकीथीमहै,वूमेनइनसाइंस।

नोबेलपुरस्कारविजेतावैज्ञानिकसीवीरमनकीउपलब्धिकोविस्मृतनहोनेदेनाभीराष्ट्रीयविज्ञानदिवसकाएकमुख्यउद्देश्यहै।सीवीरमनकोजिसरमनप्रभावपरनोबेलपुरस्कारमिलाउसकेबारेमेंआमलोगोंकीजानकारीऔरविस्मृतिकीबातदूरहै,विज्ञानपढ़नेवालेआमविद्यार्थीभीइसतरीकेसेपरिचितनहींहैं।होसकताहैकियहघटनाभीकमलोगोंकोपताहोकिजबसीवीरमनप्रतिष्ठितइंडियनइंस्टीट्यूटऑफसाइंसबंगलुरुकेनिदेशकथेतबकमलाभगतनेबड़ीउम्मीदसेइससंस्थानमेंअपनेप्रवेशकाआवेदनदियाथा।

सीवीरमननेउसेनामंजूरकरदिया।कमलाभगतकादेशकीपहलीमहिलाविज्ञानशोधार्थीबननेकासपनाटूटगया।यहइन्कारइसलिएनहींकियागयाथाकिआवेदनकर्ताकीप्रतिभा,कौशल,दक्षता,अध्ययनअथवाज्ञानमेंकहींकोईकमीथी,बल्किइसलिएकिआवेदनमहिलाकाथाऔरइंस्टीट्यूटमेंकिसीमहिलाकेरहनेकीजगहनहींथी।

इतनेबड़ेसंस्थानकेनिर्माणसेउसकेप्रतिष्ठितहोनेतकयहनहींसोचागयाकिदेशमेंकभीकोईमहिलाभीविज्ञानकीअध्येताबनेगी।यह1930कीबातथी।लेकिनस्थितियां90बरसोंमेंबदलीहैं,ऐसामुकम्मलतौरपरकहनामुश्किलहै।विज्ञान,तकनीक,वैज्ञानिकशोध,इंजीनियरिंग,गणितकेक्षेत्रमेंलैंगिकभेदऔरविषमताव्यापकरूपसेकायमहै।आंकड़ेबतातेहैंकिबीतेएकदशककेदौरानविज्ञानतकनीककेक्षेत्रमेंमहिलापुरुषकीदूरीचारफीसदसेज्यादाकमनहींहोपाईहै।

‘वर्ल्डइकॉनोमिकफोरम’काकहनाहैकिहमेंइसदरसेइसकोपाटनेमेंसौसाललगेंगे।बहुतसीवजहेंहैंजिनकेचलतेमहिलाओंकाविज्ञानतकनीककेक्षेत्रमेंआनाआवश्यकहै।महिलाओंकीसमुचितहिस्सेदारीकेबिनादेशकेसर्वांगीणविकासकालक्ष्यपानासंभवनहींहै।इसकेलिएमहिलावैज्ञानिकोंकेलिएअवसरपैदाकरनाऔरउच्चशिक्षाकेक्षेत्रमेंउन्हेंआगेबढ़नेकेलिएप्रेरितकरनाजरूरीहै।परदेशमेंवैज्ञानिकशोधएवंअनुसंधानकेक्षेत्रमेंमहिलाओंकाउत्कृष्टयोगदानहैऔरक्षमताकईबारप्रमाणितहोनेकेबावजूदउन्हेंसमुचितप्रोत्साहनवअवसरनहींमिला।

विज्ञानसेसंबद्धसंस्थाओंमेंमहिलाओंकीमौजूदगीकेमामलेमेंभारत69देशोंकीसूचीमेंनिचलेपायदानपरहै।भारतीयराष्ट्रीयविज्ञानअकादमीमें2013मेंकुल864सदस्योंमेंसिर्फ52महिलाएंथीं।आजभीआनुपातिकरूपसेपरिदृश्यकमहीबदलाहै।भारतकीतुलनामेंअमेरिका,स्विट्जरलैंडऔरस्वीडनकीराष्ट्रीयअकादमीमें47फीसदमहिलाएंहैं।देशमेंमहिलाएंअमूमनमुख्यधाराकेविज्ञानसेदूरहैं,उन्हेंप्रमुखवैज्ञानिककेरूपमेंकामकरनेकाअवसरनहींमिलता।देशके620संस्थानोंजैसेआइआइटी,एनआइटी,इसरो,डीआरडीओमेंवैज्ञानिकऔरप्रशासनिकविंगमेंमहिलाकार्यबलमें20फीसदसेकमहैं।यहस्थितितबहैजबविज्ञान,तकनीक,इंजीनियरिंगऔरगणितकेक्षेत्रमेंहमदुनियामेंसबसेज्यादामहिलास्नातकपैदाकरतेहैं।

तबआखिरइसबातकारोनाक्योंहैकिविज्ञानकेक्षेत्रमेंमहिलाओंकाटोटाहै।सच्चाईयहहैकिदुनियाभरकीविज्ञानतकनीकमेंस्नातकयुवतियोंका 44फीसदयहांरहताजरूरहै,मगरभारीसंख्यामेंयेस्नातकलड़कियांकैरियरबनानेकीदिशामेंबढ़नेकीबजायशादीकरकेघरबसालेतीहैं।कुछरेलवे,बैंक औरप्रबंधनतथादूसरेगैरवैज्ञानिकपढ़ाई,कोर्सेजऔरनौकरियोंकीतरफमुड़जातीहैं।इंजीनियरिंग,मेडिकलआइटी,दंतचिकित्सा,पैरामेडिकऔरजीवविज्ञानपढ़ाईकीतरफबढ़नेवालोंकीसंख्याफिरभीकुछहोतीहै,मगरभौतिकी,रसायन,गणित,प्रकृतिविज्ञानकीतरफबढ़नेवालोंकाप्रतिशतन्यूनहै।

विज्ञानऔरतकनीककेक्षेत्रमेंमहिलाओंकोदियाजाएप्रोत्साहन:ग्रेजुएटपैदाकरनेमेंहमदुनियामेंअव्वलमगरकामदेनेमेंहमारानंबर19वांहै,वहभीतबजबसरकारनेविज्ञानऔरतकनीककेक्षेत्रमेंमहिलाओंकोप्रोत्साहनदेनेकीकईयोजनाएंचलारखीहैं।जिन15फीसदकोविज्ञानकीपढ़ाईकेबदौलतउनकेक्षेत्रमेंकाममिलताभीहैउनमेंसेआधीमहिलाएंहीहैं,जोसीधेसीधेशोध,विकासइत्यादिसेजुड़ीहैं।यहीवजहहैकिविज्ञान,तकनीकऔरअभियांत्रिकीकेक्षेत्रमेंमहिलाओंमौजूदगीनगण्यहै।

चिकित्सा,सूचनातकनीकऔरकंप्यूटरइत्यादिकेपेशेसेजुड़ीकुछमहिलाएंदिखतीहैं,लेकिनबाकीक्षेत्रोंमेंमहिलाएंनदारदक्योंहैं?हालांकिसरकारीआंकड़े इसदिशामेंआनुपातिकबढ़तकेआंकड़ेऔरआजादीकेपहलेसेअबतककीमहिलावैज्ञानिकविभूतियोंकीसूचीजरूरपेशकरदेंगे।साथहीकुछअंतरराराष्ट्रीयख्यातिप्राप्तभारतीयविज्ञानीऔरउद्यमीमहिलाओंकाजिक्रकरकेमानलियाजाएगाकिअपनेदेशमेंइसक्षेत्रकीतस्वीरगुलाबीहै।लेकिनहकीकतइससेउलटहै।-(ईआरसी)

[विज्ञानविषयोंकेपत्रकार]

By Day